बॉर्डर तो इतनी बार देखी है कि अब तो गिनती भी याद नहीं। शायद उस फ़िल्म का ही असर था 13 साल के बाद कोई फिल्म फ़िर से फर्स्ट डे देखने निकल गई। 1997 में बॉर्डर फ़िल्म आई थी, फिल्म का एक एक सीन मन में बसा हुआ, हर एक गाना ज़ुबान पर चढ़ा हुआ और अब 29 साल बाद बॉर्डर 2..कैसे न जाती भला। पहली वाली बॉर्डर के प्यार में इतना तो बनता ही था न…😍
चलो अब आते हैं बॉर्डर 2 पर..
देखो भाई मेरी पीढ़ी वाले लोग पहली वाली से तुलना करोगे तो निराश ही होगे तो सबसे ज़रूरी बात तो यही है कि अपने दिमाग़ से बॉर्डर वाले नास्टेल्जिया को घर पर ही छोड़ के जाइए
29 साल बाद वाली पीढ़ी से पहले वाली फीलिंग, लगाव और इमोशंस की उम्मीद करोगे तो निराशा ही हाथ लगेगी। फिल्म 2026 में आई है उसकी उसी लिहाज़ से देखेंगे तो बेहतर रहेगा
ओरिजिनल ओरिजिनल ही होता है यार। नया कांसेप्ट, नई कहानी और बढ़िया ट्रीटमेंट। बॉर्डर में अक्षय खन्ना के चेहरे पर जो मासूमियत थी वह मासूमियत आजकल 15 -16 साल के लड़कों के चेहरे पर भी नहीं दिखती.. ऐसी भावनात्मक फिल्मों में राखी जी की भूमिका का कोई दूसरा अल्टरनेटिव हो ही नहीं सकता..ऐ गुजरने वाली हवा बता……गाना और संगीत सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं..तो इतना सब सिक्वल में न ढूंढे और फिल्म को नई फ़िल्म की तरह एंजॉय करें
वरुण धवन और दिलजीत दोसांझ ने बढ़िया काम किया है। अभी तक की फिल्मों से हटकर। अहान शेट्टी का लुक बहुत फ्रेश और क्यूट है। सनी पाजी अपने पुराने रोल में ही हैं चीखते चिल्लाते हुए। मोना एक फ़ौजी की पत्नी और मां के रोल में अच्छी रही हैं । बाक़ी सभी हीरोइन का रोल ऐसा नहीं जिसके बारे में बहुत चर्चा की जाए।
कुल मिलाकर बात यह है कि बॉर्डर सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं एक एहसाह है। हम भले ही बॉर्डर पर नहीं खड़े हैं पर हमारी रगों में खून देशभक्ति वाला ही बहता है इसलिए मुझे यह फ़िल्म भी अच्छी लगी। एक बार देख चुकी हूं दोबारा भी देख सकती हूं।😊





