September 18, 2026 11:43 am

बेतुकी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई न करे सुप्रीम कोर्ट : क़ानून मंत्री

नई दिल्ली: केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (संशोधन) विधेयक, 2022 पर बोलते हुए राज्यसभा में कहा कि ऐसे समय में जब ढेरों मामले लंबित हों, तो सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं को जमानत याचिकाओं और बेतुकी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए. रिजिजू ने बुधवार को उच्च सदन में नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र का नाम बदलकर भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र करने के लिए विधेयक पेश किया और इसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया. इसी दौरान उन्होंने उक्त टिप्पणी की.

 इससे बहुत अधिक अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा

रिजिजू ने कहा, ‘मैंने भारत के उच्चतम न्यायालय के लिए भली नीयत से कुछ टिप्पणियां की हैं कि आप उन्हीं मामलों पर सुनवाई करें जो प्रासंगिक हैं. यदि सर्वोच्च न्यायालय जमानत याचिकाओं या बेतुकी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करते है तो इससे बहुत अधिक अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा.’ उन्होंने आगे कहा, ‘4 करोड़ से अधिक मामले निचली अदालतों, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी है, में लंबित हैं. हम बेहतर बुनियादी ढांचा बनाने के लिए पैसा देते हैं, सहायता करते हैं. लेकिन हमें न्यायपालिका से यह सुनिश्चित करने के लिए कहना होगा कि केवल योग्य लोगों को ही न्याय मिले उनकी टिप्पणी पर विपक्ष के नेताओं ने आपत्ति जताई है.

 सिब्बल ने पूछा कि आप स्वतंत्रता का मतलब भी जानते हैं?
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने ट्वीट करते हुए पूछा कि क्या वह (रिजिजू) स्वतंत्रता का मतलब भी जानते हैं?  कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘उन्होंने शायद कभी जस्टिस कृष्ण अय्यर का लिखा- जेल नहीं, जमानत नियम है- नहीं पढ़ा. कैसे एक कानून मंत्री यह कह सकता है कि सुप्रीम कोर्ट को जमानत याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए.’ कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा, ‘एनजेएसी को भूल जाइए, सरकार न्यायपालिका को माइक्रो मैनेज करना चाहती है, छुट्टियों में कटौती, जमानत को प्राथमिकता न देना, वगैरह. आगे क्या?’

मालूम हो कि केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू पिछले कुछ समय से न्यायपालिका, सुप्रीम कोर्ट और कॉलेजियम प्रणाली पर हमलावर बने हुए हैं. अक्टूबर 2022 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का ‘मुखपत्र’ माने जाने वाले ‘पांचजन्य’ की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका के लिए समान शब्दों का इस्तेमाल किया था और कहा था कि न्यायपालिका कार्यपालिका में हस्तक्षेप न करे.
साथ ही, उन्होंने जजों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली पर निशाना साधते हुए यह भी कहा था कि जजों की नियुक्ति सरकार का काम है. उन्होंने न्यायपालिका में निगरानी तंत्र विकसित करने की भी बात कही थी.इसी तरह बीते चार नवंबर को रिजिजू ने कहा था कि वे इस साल के शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजद्रोह कानून पर रोक लगाने के फैसले से दुखी थे. बहरहाल, विवादित टिप्पणी करने के दौरान रिजिजू ने जो नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र (संशोधन) विधेयक -2022 पेश किया, वह लोकसभा ने अगस्त 2022 में पारित किया था, जो मध्यस्थता के अलावा वैकल्पिक विवाद समाधान के अन्य रूपों को शामिल करने के लिए इसका विस्तार करता है.
UP Ka Agenda
Author: UP Ka Agenda

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