- 37 सप्ताह से पहले बच्चे का जन्म यानी Preterm Birth, नवजात को हो सकती हैं कई गंभीर परेशानियां.
- पेट में ऐंठन, लगातार कमर दर्द या पानी जैसा डिस्चार्ज दिखे तो न करें Ignore.
- Regular Checkup, Healthy Diet और Timely Treatment से कम किया जा सकता है खतरा.
LUCKNOW: Pregnancy के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है. खासकर Preterm Delivery यानी समय से पहले प्रसव के संकेतों को Ignore करना खतरनाक हो सकता है. भारत में हर साल करीब 30 लाख बच्चे समय से पहले जन्म लेते हैं. ऐसे बच्चों को सांस लेने में परेशानी, संक्रमण, कम वजन और शारीरिक विकास से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.
नवंबर में मनाए जाने वाले Preterm Birth Awareness Month के मौके पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. आंचल ने गर्भवती महिलाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है. उनका कहना है कि Pregnancy में होने वाले हर असामान्य बदलाव को समझना जरूरी है. Symptoms दिखने पर खुद से इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
37 Weeks से पहले Delivery यानी Preterm Birth
डॉ. आंचल के मुताबिक, Normal Pregnancy करीब 40 सप्ताह की होती है. इस दौरान बच्चे के Lungs, Brain और दूसरे जरूरी अंगों का विकास होता है. लेकिन अगर बच्चे का जन्म 37 सप्ताह पूरे होने से पहले हो जाता है तो इसे Preterm Birth कहा जाता है.
ऐसे Newborn Babies को सांस लेने, दूध पीने और शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में परेशानी हो सकती है. कई बार उन्हें NICU में भर्ती करना पड़ता है. बहुत जल्दी जन्म लेने वाले बच्चों में आगे चलकर देखने, सुनने, सीखने और शारीरिक विकास से जुड़ी दिक्कतें भी हो सकती हैं.
पेट में ऐंठन और Back Pain को न करें Ignore
Pregnancy में कुछ Symptoms ऐसे होते हैं जिन्हें सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉ. आंचल के अनुसार, पेट के निचले हिस्से में लगातार ऐंठन, Periods जैसा दर्द, बार-बार पेट का सख्त होना और लगातार Lower Back Pain Preterm Labour के संकेत हो सकते हैं.
इसके अलावा Vagina से पानी जैसा Liquid निकलना, Bleeding होना, Discharge बढ़ना या Pelvic Area में ज्यादा Pressure महसूस होना भी Warning Signs हैं.
ऐसी स्थिति में घर पर आराम करके Symptoms ठीक होने का इंतजार न करें. तुरंत नजदीकी अस्पताल या Gynecologist से संपर्क करें. समय पर इलाज मिलने से कुछ मामलों में Delivery को सीमित समय तक टालने और बच्चे के लिए जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है.
High BP और Diabetes में बढ़ जाता है Risk
कुछ महिलाओं में Preterm Delivery का खतरा दूसरों की तुलना में ज्यादा होता है. अगर पहले भी समय से पहले Delivery हो चुकी है तो दोबारा ऐसा होने की आशंका बढ़ सकती है.
इसके अलावा Cervix की लंबाई कम होना, Urine या Genital Infection, Twins या Multiple Pregnancy भी Risk Factors हैं. 35 वर्ष से अधिक उम्र, बहुत कम उम्र में Pregnancy, High BP, Diabetes और Thyroid की समस्या होने पर खास सावधानी जरूरी है. पोषण की कमी, Smoking और समय पर Antenatal Checkup न कराना भी खतरे को बढ़ा सकता है.
Regular Checkup है सबसे जरूरी
Preterm Delivery के Risk को पहचानने के लिए समय-समय पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है. डॉक्टर की सलाह पर Pregnancy के 18 से 24 सप्ताह के बीच Ultrasound के जरिए Cervical Length की जांच कराई जा सकती है.
गर्भवती महिलाओं को Balanced Diet, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद पर ध्यान देना चाहिए. पेशाब में जलन या असामान्य Vaginal Discharge जैसे Infection के लक्षणों को भी Ignore नहीं करना चाहिए. Smoking, Alcohol और बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेने से बचना चाहिए.
Timely Treatment से बच सकती है बच्चे की सेहत
Preterm Labour की आशंका होने पर डॉक्टर Cervix, Uterine Contractions और बच्चे की स्थिति की जांच करते हैं. जरूरत पड़ने पर बच्चे के फेफड़ों के विकास में मदद करने वाली दवाएं दी जा सकती हैं. कुछ परिस्थितियों में Delivery को थोड़े समय के लिए टालने वाली दवाएं भी दी जाती हैं.
हालांकि हर मामले में Preterm Delivery को रोकना संभव नहीं होता, लेकिन समय पर इलाज से बच्चे को जन्म के बाद होने वाली गंभीर परेशानियों से बचाने में मदद मिल सकती है.
डॉ. आंचल का कहना है कि Pregnancy Care सिर्फ महिला की जिम्मेदारी नहीं है. परिवार को भी उसकी सेहत का ध्यान रखना चाहिए. Regular Checkup, Nutritious Food, Proper Rest और जरूरत पड़ने पर तुरंत अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था परिवार की प्राथमिकता होनी चाहिए.
इन 5 Warning Signs को बिल्कुल न करें Ignore
- पेट के निचले हिस्से में लगातार ऐंठन या बार-बार Contractions होना.
- Vagina से पानी जैसा Liquid निकलना या Bleeding होना.
- Lower Back में लगातार दर्द बने रहना.
- पेट के निचले हिस्से या Pelvic Area में असामान्य Pressure महसूस होना.
- Vaginal Discharge अचानक बढ़ना या उसकी प्रकृति में बदलाव आना.





