– भारतीय मूल के मतदाताओं को साधने के लिए उम्मीदवारों की खास रणनीति, कहीं डोसा बनाते दिखे तो कहीं मंदिरों में पहुंचे नेता.
– टेक्सास से लेकर कैलिफोर्निया तक भारतीय समुदाय का बढ़ता प्रभाव, स्विंग स्टेट्स में एक-दो प्रतिशत वोट भी बदल सकते हैं चुनावी तस्वीर.
WASHINGTON : अमेरिका में मध्यावधि चुनाव की सरगर्मी के बीच भारतीय-अमेरिकी मतदाता उम्मीदवारों के लिए खास आकर्षण बन गए हैं. इन मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए अमेरिकी नेता अब सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, खानपान और धार्मिक आयोजनों से जुड़कर अपनेपन का संदेश भी दे रहे हैं. कोई भारतीय रेस्तरां में डोसा बनाकर अपनी देसी समझ दिखा रहा है तो कोई मंदिर पहुंचकर दिवाली समारोह में शामिल हो रहा है.
तवे पर डोसा बनाकर मांगा समर्थन.
टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टैलेरिको ने डलास के उपनगर इरविंग स्थित एक भारतीय रेस्तरां में डोसा बनाने का प्रयास किया. यहां भारतीय-अमेरिकियों की बड़ी आबादी रहती है. काले सूट और सफेद कमीज में पहुंचे टैलेरिको ने खुद डोसे का घोल तवे पर फैलाया, उसमें मसालेदार आलू का मिश्रण डाला और कुरकुरा डोसा तैयार कर केले के पत्ते पर परोसा. टैलेरिको टेक्सास में अमेरिकी सीनेट चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को चुनौती दे रहे हैं.
मंदिरों में पहुंचकर दिखा रहे सांस्कृतिक जुड़ाव.
भारतीय मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए मंदिर भी अमेरिकी नेताओं की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन रहे हैं. कनेक्टिकट के गवर्नर नेड लैमोंट ने स्टेट कैपिटल में आयोजित दिवाली समारोह में हिस्सा लिया. उनके साथ उप विदेश सचिव जेनिफर बाराहोना भी मौजूद थीं.
ओहियो के सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने शेरोनविले स्थित बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर की वर्षगांठ में भाग लिया. न्यू जर्सी के सीनेटर कोरी बुकर अक्षरधाम मंदिर में दिवाली समारोह में शामिल हुए. वहीं, सांसद रैंडी फाइन और स्काट पेरी पेंसिल्वेनिया के हैरिसबर्ग स्थित एक मंदिर पहुंचे. मिशिगन के सांसद जान जेम्स भी स्वामीनारायण मंदिर पहुंचे. उन्होंने वहां पूजा स्थल की परंपराओं को समझने के साथ हिंदू-अमेरिकी समुदाय की सेवा भावना को करीब से जानने का प्रयास किया.
एक-दो प्रतिशत वोट भी बदल सकते हैं नतीजे.
अमेरिका के कैलिफोर्निया, टेक्सास, न्यू जर्सी, न्यूयार्क, वाशिंगटन, इलिनोइस, पेंसिल्वेनिया और जार्जिया जैसे राज्यों में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की मजबूत मौजूदगी है. खासकर जार्जिया, पेंसिल्वेनिया, मिशिगन और उत्तरी कैरोलिना जैसे चुनावी राज्यों में मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है. ऐसे में एक-दो प्रतिशत वोट भी चुनाव का रुख बदलने की ताकत रखते हैं. यही वजह है कि अमेरिकी उम्मीदवारों के लिए अब डोसा, दिवाली और मंदिर सिर्फ सांस्कृतिक जुड़ाव के माध्यम नहीं, बल्कि मतदाताओं तक पहुंचने का अहम चुनावी जरिया बन गए हैं.





