- सरकार बनाने के लिए मध्यमार्गी गठबंधन और अरब पार्टियों के बीच बातचीत तेज
- नेतन्याहू विरोधी खेमे के पास बहुमत की उम्मीद, 61 सीटों के आंकड़े तक पहुंचने की चुनौती
NEW DELHI: इजरायल में चुनाव के नतीजों के बाद अब सरकार बनाने को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का आंकड़ा उससे दूर है. दूसरी ओर, नेतन्याहू को सत्ता से बाहर रखने के लिए मध्यमार्गी दलों ने अरब पार्टियों से बातचीत शुरू कर दी है. चुनाव में अरब दलों को कुल 19 सीटें मिली हैं. ऐसे में सरकार गठन की पूरी कवायद अब इन दलों के समर्थन पर निर्भर होती दिख रही है.
पूर्व सेना प्रमुख गादी आइसेनकोट के नेतृत्व वाले मध्यमार्गी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं. बहुमत के लिए उसे 13 और सीटों की जरूरत है. इसके लिए गठबंधन अरब पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, इन दलों के साथ समझौते को लेकर इजरायल की राजनीति में मतभेद भी सामने आ रहे हैं. नेतन्याहू लगातार अरब पार्टियों के साथ किसी भी तरह के समझौते का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि ऐसे दलों के सहयोग से सरकार बनाना देश के लिए घातक हो सकता है.
‘धैर्य रखें, पर्दे के पीछे बातचीत जारी’
सरकार गठन को लेकर जारी हलचल के बीच पूर्व प्रधानमंत्री याइर लैपिड ने नेतन्याहू विरोधी खेमे के समर्थकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि अगर लोग जानना चाहते हैं कि पर्दे के पीछे कुछ चल रहा है तो इसका जवाब हां है. लैपिड ने कहा कि चुनाव में जीत, जीत होती है और यह सच है कि अब नेतन्याहू विरोधी खेमे के पास बहुमत है.
एपी के मुताबिक, नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गठबंधन की अरब पार्टियों के साथ सहयोग की संभावना नहीं है. ऐसे में आइसेनकोट के नेतृत्व वाले मध्यमार्गी गठबंधन और अरब दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है. दोनों खेमे नेतन्याहू के विरोध में चुनाव लड़े हैं. वर्ष 2021 में भी याइर लैपिड और नाफ्ताली बेनेट की सरकार के गठन में अरब पार्टियों ने समर्थन देकर अहम भूमिका निभाई थी. इस बार भी सत्ता परिवर्तन के लिए इसी तरह के समझौते की संभावना तलाश की जा रही है.
नए स्पीकर के चुनाव पर भी नजर
विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू अरब पार्टियों को निशाना बनाकर मध्यमार्गियों और उनके बीच संभावित समझौते को रोकने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने चुनाव में विदेशी धन के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया है. हालांकि, इस आरोप के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है. मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं.
रायटर के अनुसार, निर्वाचित सदस्य 10 नवंबर को नीसेट यानी इजरायल की संसद में शपथ लेंगे. इसके साथ ही नई संसद का गठन होगा. आइसेनकोट का गठबंधन नई सरकार बनने से पहले संसद के नए स्पीकर का चुनाव कराना चाहता है. स्पीकर का चुनाव सदन में बहुमत के आधार पर होगा. ऐसे में इस चुनाव को सरकार गठन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है. दूसरी ओर, यदि विपक्षी दलों के बीच सहमति नहीं बनती है तो अगला चुनाव होने तक नेतन्याहू कार्यवाहक सरकार के प्रमुख बने रह सकते हैं.





